Tuesday, 9 May 2017

तुम हो...

उदास सी सुबह,
एक ख्याल,
और मेरा मुस्कुराना,
वो ख्याल तुम हो...
यूंही कभी चलते चलते,
मेरा ठहर जाना,
मुड़कर देखना पीछे,
मुझे याद तुम हो...
बारिशों वाले मौसम में,
बादलों से झिलमिलाना,
फिर छिप जाना पल भर में,
हां धूप तुम हो...
ठहरी सी सर्द रात,
चमचमाता चांद,
एक टूटता सितारा,
हर बार तुम हो...
मेरा यूं हंसते जाना कि,
आंखें  छलक जायें
आंखों में ठहरी सी नमी,
वो एक बूंद तुम हो..
अधूरी सी ख्वाहिशों को,
दिल में मोती बनाना,
बरसना दिल के आंगन में,
बरसात तुम हो...
किसी पहचानी सी खुश्बू का,
मुझे छूकर गुजर जाना,
वो एक पल साथ होने का,
अहसास तुम हो...
जिदंगी के परचे में
अधूरा जवाब लिख आना,
बहुत मुश्किल सा था समझना जो,
वो सवाल तुम हो... !



  

Thursday, 23 March 2017

#दिसबंर डायरी#4

लड़की को पीला रंग पसंद था..
खुला ,उजला,खिली धूप सा चटक...
पीले रंग से उसे प्यार की खुश्बू आती थी...
वो एक गरमीयों की दोपहर थी
जब लड़की ने उसे पहली बार देखा...
अमलतास के पेड़ के नीचे...
साईकल की चैन चढ़ाते हुए..
कच्चे हरे रंग की शर्ट का असर था शायद
जो पीले अमलतास के फूलों के साथ खूबसूरती के साथ
कंट्रास्ट में थी...या फिर
लड़की को उसके छल्ले बालों का माथे पर बेपरवाह
पड़ा होना भाया था....
कुछ तो हुआ था उस पल..
लड़की के ख्बबों में अब अकसर पीले अमलतास के फूल आने लगे थे.....
धूप की खुश्बू और बढ. गयी थी.....
लड़की के कदम अब उस अमलतास के पास से गुज़रते धीमे हो जाते...
ना वहां साईकल होती थी..ना वो छल्ले बाल...
फिर भी लड़की बेसाख्ता मुस्कुराती थी वहां से गुजरते हुऐ...
वो दिन आंधी भरा था...गरजते हुए बादल...
लड़की बारिश शुरू होने से पहले घर पहुंचना चाहती थी..
तेज कदमों से चलती लड़की अचानकी ठिठकी थी..
ठीक अमलतास के नीचे खड़ी साइकल..छल्ले बाल...
बरहाल शर्ट आज आसमानी थी...खुले से आसमानी नीले रंग की...
लड़की के धीमे होते कदम और तेज़ होती बू़ंदें...
परफेक्ट टाईमिंग के साथ बारिश तभी तेज हुई
जिस पल लड़की अमलतास के पास पहुंची...
अमलतास बहुत खुश था....
उसके पीले फूल, आसमानी शर्ट और
हलका जामुनी दुपट्टा....
इंद्रधनुष जैसे आज अमलतास के नीचे निकला था...
कुछ पलों का वो साथ...और कुदरत की वो जादूगरी...
आसमानी शर्ट और जामुनी दुपट्टा अब साथ साथ सूखते है़
उस कोने वाले घर के आंगन में बंधे तार पर
जिसके बाहर अमलतास का पेड. पीले फूल बिखेरता है..
खिली धूप से चटख पीले फूल....!!!

Thursday, 23 February 2017

#December diary3#

बरसात का मौसम  बीतने वाला था...
छाते, बरसाती सहेजती लड़की
देख रही थी खिड़की के बाहर...
उस काले अकेले बादल को...
जो लगता था किसी बरफ़ देश से निकला...
लड़की की आँख में शायद कुछ गिरा था...
ठंडा..चुभता.. दिसंबर के महीने सा...
एक आँसू ने ठिठक कर आँख से बाहर झांका..
और गाल पर फिसल गया...
लड़की उदास थी...कुछ कहना चाहती थी...
खिड़की से देखती लड़की...
और आसमान पर टंगा बादल....
बेनाम सा एक रिश्ता...
किसी के इंतजार से खिंचता.
भटकता, टहलता वो बादल
आ पहुँचा खिड़की के ठीक ऊपर..
लड़की ने हाथ बढाकर कुछ लिख दिया बादल पर
उस दिन से वो एक बादल,
उस खिड़की से जैसे बंधा है...
हर रोज गरजता है...बरसता है...
और फिर खामोश हो जाता है...
जैसे कि किसी दुआ में हो....
कहते हैं लड़की ने बादल पर
कोई नाम लिख दिया था....!!!

Monday, 20 February 2017

#दिसंबर डायरी#2

लड़की को बारिशें पसंद थीं.....
बारिश की बूंदों मे भीगकर खुद भी बारिश हो जाना पसंद था उसे......
लड़का सरदियों के मौसम सा था...खूबसूरत...कशिश भरा...पास से गुजरे तो सिहरन हो ...कुछ ऐसा.....
लड़का बरफ के देश से आया था...कोहरा पसंद था उसे...
लड़की ने जब पहली बार देखा उसे...जैसे जम गयी वो...पूरे एक महीने सतरह दिन....
फिर बरफ पिघली...
और दिसंबर के महीने में बरसातें हुयीं....
कच्ची सी धूप में इंद्रधनुष निकला था...
जिसके सारे रंग लड़की के दुपट्टे में थे.....
लड़का ने गौर से लड़की को देखा और उसकी आँखों में झांक कर पूछा था..."प्यार करती है मुझे..."...
जबाब में लड़की ने सर झुकाया और धूप खिल -खिलाकर हँस पड़ी...
लड़का और लड़की अब साथ थे....
जून- जुलाई से...एक दूसरे का हाथ थामे...सर्दी गर्मी और बरसातों के सफर तय करते हुए...
कुछ सदियां बीत गयीं....
फिर एक दिन मौसमौ का मिजा़ज बदला....
गर्मी का मौसम ठहर गया था....
लड़का पिघलने लगा....
यह पिघलना लड़की को बैचेन कर रहा था...
एक दिन लड़की ने उसे विदा किया...
बऱफीले देश की ओर...
लड़के ने वादा किया अगले दिसंबर फिर से आने का...
लड़की आज भी इंतजार कर रही है उस दिसंबर का...
जिसका पन्ना गायब है उसके कैलेंडर से...!!!

#दिसंबर डायरी#1

एक थी लड़की, खूबसूरत और शर्मीली सी...जो रहती थी ख्बाबों में ज्यादा...दुनिया में थोड़ा कम..
पढ़ती थी किताबों में प्यार वाली कहानियां और सोचती रहती थी न जाने क्या...
फिर एक दिन एक लड़का उसकी जिंदगी मे आया...और लड़की की दुनिया जैसे बदल गयी..
अब लडकी कहानियां नहीं पढ़ती थी....गाने सुनती थी...प्यार वाले गाने...
पहले से ज्यादा सुंदर हो गयी थी....लडकी भी और उसकी दुनिया भी.....
लड़का इस सब से बेखबर नहीं था......मगर हंसता था लड़की के दीवानेपन पर...
दिसंबर का वो महीना बसंत बन गया था जैसे....हर तरफ फूल थे...खुशबू वाले...
फिर एक दिन सब कुछ बदल गया....
लड़के को बुलावा आ गया परदेस से....उसे जाना था....जिदंगी मे आगे बढ़ना था...
जाने से पहले लड़का मिलने आया...
लड़की हंसकर विदा कर रही थी...
रोकने या रूकने का रिश्ता नहीं था दोनों के बीच...
'फिर मिलेंगे', ऐसा कोई वादा भी नहीं था...
तभी जोर से बारिश होने लगी...
लड़की ने चुपके से बादल को शुकि्या कहा...
और बारिश की बूंदों में एक आंसू को घुल जाने दिया....
उस साल खूब बरसातें हुईं ....

आज भी लडकी खूबसूरत है...
पर पहले से थोड़ा सा कम...
अब भी शर्मीली सी है...
लेकिन अब दुनिया में ज्यादा रहती है...
ख्बाबों में थोड़ा कम...
हां दिसंबर आज भी उसका फेवरिट महीना है.....
और लड़का....जब भी बारिश होती है तो भीगता है ....
और चुपके से बहा देता है उस एक आंसू को जो सहेजा था उसने ....
कुछ बीस बरस पहले....!

Sunday, 5 February 2017

खुशबू  को बहुत शौक  है फैलै, मगर ये शौक
मुमकिन नहीं हवाओं से रिश्ता किये बगैर... 

Friday, 23 December 2016

She was in love...
She remained in love...
She turned into love...
And lived forever....!!!