बरसात का मौसम बीतने वाला था...
छाते, बरसाती सहेजती लड़की
देख रही थी खिड़की के बाहर...
उस काले अकेले बादल को...
जो लगता था किसी बरफ़ देश से निकला...
लड़की की आँख में शायद कुछ गिरा था...
ठंडा..चुभता.. दिसंबर के महीने सा...
एक आँसू ने ठिठक कर आँख से बाहर झांका..
और गाल पर फिसल गया...
लड़की उदास थी...कुछ कहना चाहती थी...
खिड़की से देखती लड़की...
और आसमान पर टंगा बादल....
बेनाम सा एक रिश्ता...
किसी के इंतजार से खिंचता.
भटकता, टहलता वो बादल
आ पहुँचा खिड़की के ठीक ऊपर..
लड़की ने हाथ बढाकर कुछ लिख दिया बादल पर
उस दिन से वो एक बादल,
उस खिड़की से जैसे बंधा है...
हर रोज गरजता है...बरसता है...
और फिर खामोश हो जाता है...
जैसे कि किसी दुआ में हो....
कहते हैं लड़की ने बादल पर
कोई नाम लिख दिया था....!!!
छाते, बरसाती सहेजती लड़की
देख रही थी खिड़की के बाहर...
उस काले अकेले बादल को...
जो लगता था किसी बरफ़ देश से निकला...
लड़की की आँख में शायद कुछ गिरा था...
ठंडा..चुभता.. दिसंबर के महीने सा...
एक आँसू ने ठिठक कर आँख से बाहर झांका..
और गाल पर फिसल गया...
लड़की उदास थी...कुछ कहना चाहती थी...
खिड़की से देखती लड़की...
और आसमान पर टंगा बादल....
बेनाम सा एक रिश्ता...
किसी के इंतजार से खिंचता.
भटकता, टहलता वो बादल
आ पहुँचा खिड़की के ठीक ऊपर..
लड़की ने हाथ बढाकर कुछ लिख दिया बादल पर
उस दिन से वो एक बादल,
उस खिड़की से जैसे बंधा है...
हर रोज गरजता है...बरसता है...
और फिर खामोश हो जाता है...
जैसे कि किसी दुआ में हो....
कहते हैं लड़की ने बादल पर
कोई नाम लिख दिया था....!!!